पैक्स सिलिका के लिए भारत क्यों बना सबसे ‘अच्छा’ बाजार? क्या चीन के दबदबे का बन पाएगा मजबूत विकल्प…

भारत फरवरी 2026 में ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन में शामिल हो सकता है। अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई इस रणनीतिक और कूटनीतिक संगठन को पिछले साल दिसंबर में शुरू किया गया था।

लेकिन आखिर हैं क्या ये गठबंधन और इसका नाम पैक्स सिलिका क्यों पड़ा?

हमारे सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक दिनभर में जितने भी उपकरण से हम दो-चार होते हैं उसमें ज्यादातर में चिप यानी सेमीकंडक्टर लगी होती है। लेकिन इसे बनाना बहुत मुश्किल होता है।

चिप को लेकर दुनिया भर के बाजार में होड़ रहती है। चूंकि इसका उत्पादन कम है तो दुनिया भर में इसके लिए तनातनी की भी शिकायतें रहती हैं।

क्या है पैक्स सिलिका का मतलब?

सेमीकंडक्टर की सुरक्षा के लिए दुनिया ने एक नया नियम बनाया है, जिसे पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन कहा जा रहा है। पैक्स का अर्थ है ‘शांति’ और ‘सिलिका’ यानी सिलिकॉन।

चिप बनाने के लिए सिलिकॉन सबसे जरूरी कंपोनेंट होता है। कुछ इस तरह इस समूह का नाम पड़ा है।

यह अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे 11 देशों का समूह है। इसका मकसद सेमीकंडक्टर और एआई की सप्लाई चेन से चीन का दबदबा खत्म करना है।

भारत को क्या फायदा होगा?

भारत में चिप उत्पादन से इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होंगे। ‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ के तहत सरकार 85,000 युवाओं को प्रशिक्षित कर रही है। इससे रोजगार का सृजन होगा।

भारत इसलिए भी दुनिया के लिए अहम है क्योंकि भारत में सेमीकंडक्टर बनाने और बेचने का बड़ा बाजार है। इसके अलावा भारत को चीन के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाएगा।

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