दो भारतीय विद्वानों- आदित्य प्रकाश और उनकी मंगेतर उर्मी भट्टाचार्य ने नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए मुकदमे में 200,000 डॉलर का हर्जाना जीतकर सुर्खियां बटोरीं।
दरअसल, यह विवाद अमेरिका के एक विश्वविद्यालय में अपने लंच बॉक्स में ‘पालक पनीर’ गर्म करने से जुड़ा हुआ है।
यह पूरा विवाद 05 सितंबर 2023 को शुरू हुआ, जब आदित्य प्रकाश विश्वविद्यालय के मानव विज्ञान विभाग के माइक्रोवेव में अपना खाना (पालक पनीर) गर्म कर रहे थे।
इसी दौरान वहां मौजूद एक ब्रिटिश मूल की महिला कर्मचारी ने भोजन की गंध को ‘तीखा’ और ‘बदबूदार’ बताते हुए आपत्ति जताई।
इस दौरा आदित्य ने उसे पहले समझाने की कोशिश की कि यह केवल भोजन है, लेकिन महिला कर्मचारी ने इसे मुद्दा बना दिया।
फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, आदित्य प्रकाश और उर्मी ने बताया कि यह लड़ाई कभी भी खाने के स्वाद या महक के बारे में नहीं थी, बल्कि यह मानवीय गरिमा की लड़ाई थी।
उन्होंने इसे पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता का शिकार बताया। प्रकाश के अनुसार, पश्चिम में भारतीय भोजन और लहजे का इस्तेमाल अक्सर भारतीयों को नीचा दिखाने के लिए किया जाता रहा है।
छात्रों ने दिखाई एकजुटता
संस्थागत उत्पीड़न और प्रतिशोध के बाद अन्य छात्रों ने विरोध स्वरूप भारतीय भोजन लाकर एकजुटता दिखानी शुरू कर दी। जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘दंगा’ करार देते हुए, माइक्रोवेव के शेयरिंग में इस्तेमाल पर ही रोक लगा दी।
करियर बर्बाद करने की कोशिश
इसके बाद दोनों भारतीय विद्वानों- आदित्य प्रकाश और उनकी मंगेतर उर्मी भट्टाचार्य को गंभीर संस्थागत प्रतिशोध का सामना करना पड़ा। उनकी शोध निधि रोक दी गई, उनकी सलाहकार समितियों ने इस्तीफा दे दिया और उनके करियर को बर्बाद करने की कोशिश की गई।
ऐतिहासिक समझौता और संदेश तमाम दबावों के बावजूद दोनों पीछे नहीं हटे और नागरिक अधिकार अधिनियम के तहत मुकदमा दायर किया।
आखिरकर, विश्वविद्यालय को समझौता करना पड़ा। हालांकि, संस्था ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की, लेकिन उन्हें 200,000 डॉलर का भारी हर्जाना देना पड़ा और छात्रों को डिग्री प्रदान की।
आदित्य और उर्मी ने इस जीत को ‘नैतिक विजय’ बताते हुए कहा कि यह मामला उन लाखों प्रवासियों के लिए है, जो अपमान के चलते अपनी कारों में खाना खाने को मजबूर हैं।
उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद की तो उसकी भारी सामाजिक और आर्थिक कीमत चुकानी होगी।