15 नवंबर, 2024 की सुबह आयोवा विश्वविद्यालय के अल्फा डेल्टा फी बिरादरी भवन के तहखाने का एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है।
पुलिस के बॉडी कैमरे में कैद वीडियो में 56 युवक आंखों पर पट्टी बांधे, कपड़े उतारे हुए और खाने-पीने की चीजों के मलबे के अंदर दिख रहे हैं।
पूरा तहखाना अंधेरे में डूबा हुआ था, फर्श पर खाने का मलबा बिखरा पड़ा था। आग की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने यह चौंकाने वाला मंजर देखा। जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में क्या सामने आया?
पुलिस अधिकारियों द्वारा फिल्माए गए वीडियो में युवकों की हालत देखकर माहौल बेहद खराब लग रहा है। एक अधिकारी उन 56 युवकों के ग्रुप से पूछते हुए सुनाई दे रहा है, ‘क्या कोई इस बारे में खुलकर बताना चाहता है कि क्या हो रहा है? कोई है?
क्योंकि आपको इसे मेरे नजरिए से देखना होगा, कि मैं आखिर किस मुसीबत में फंस गया हूं?’ वीडियो में पुलिस के बीच गर्मागर्म बहस भी रिकॉर्ड हुई।
पुलिस अधिकारी बार-बार यह समझाने की कोशिश कर रहे थे कि घटना कितनी गंभीर है और इसमें शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बिरादरी के अध्यक्ष ने पुलिस से क्या कहा?
बिल्डिंग के बाहर बिरादरी के अध्यक्ष ने कहा, यह गतिविधि उनकी दीक्षा की तैयारी थी और एक अनुष्ठान था जिसमें उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है और उनके साथ छेड़छाड़ की जाती है।’
पुलिस अधिकारी ने तुरंत जवाब दिया, ‘हमें आग लगने की सूचना मिली थी, हम लोगों को आग की वजह से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार, आप लोगों ने मना कर दिया।
इसके अलावा, हमें रैगिंग की यह घटना मिली, हम किसी से बात करना चाहते हैं। किसी को कुछ नहीं पता, कोई किसी को नहीं जानता। किसी को नहीं पता कि क्या हो रहा है। इसकी रिपोर्ट बनाई जा रही है। आयोवा विश्वविद्यालय को भी यह जानकारी मिलेगी।’
विश्वविद्यालय की सख्त कार्रवाई
पुलिस पहुंचने के महज 24 घंटे के अंदर आयोवा विश्वविद्यालय ने अल्फा डेल्टा फी बिरादरी को अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया था।
मई 2025 में इस बिरादरी को पूर्ण रूप से चार साल के लिए निलंबित कर दिया गया, जिसका मतलब है कि 1 जुलाई 2029 तक यह बिरादरी न तो एक्टिव रहेगी और न ही नए सदस्यों की भर्ती कर सकेगी।
विश्वविद्यालय में रैगिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है और आयोवा कानून के तहत यह गंभीर अपराध माना जाता है।
एक युवक की गिरफ्तारी
घटना के अगले दिन 21 साल के जोसेफ गया, जो पूर्व फ्रेटरनिटी सदस्य था लेकिन आयोवा विश्वविद्यालय का छात्र नहीं है को आधिकारिक कार्यों में हस्तक्षेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया।