बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 12 फरवरी को होने वाले चुनावों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने चेतावनी दी है कि उनकी पार्टी ‘अवामी लीग’ को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखना देश को दीर्घकालिक अस्थिरता की ओर धकेल सकता है।
उन्होंने कहा कि बिना समावेशी और निष्पक्ष चुनावों के बांग्लादेश का भविष्य अंधकारमय है।
उन्होंने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर आरोप लगाया कि वह अवामी लीग के लाखों समर्थकों को जानबूझकर उनके मताधिकार से वंचित कर रही है।
उन्होंने तर्क दिया कि जब आबादी के एक बड़े हिस्से को राजनीतिक भागीदारी से रोका जाता है, तो यह संस्थानों की वैधता को खत्म करता है और भविष्य में विद्रोह की स्थिति पैदा करता है।
गौरतलब है कि 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई सैकड़ों मौतों के मामले में बांग्लादेश की एक अदालत ने हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई है।
शेख हसीना का फैसला
हालांकि, हसीना ने इस फैसले को खारिज करते हुए अदालत को ‘कंगारू कोर्ट’ करार दिया। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने भी इस मुकदमे की निष्पक्षता पर चिंता जताई है।
बहरहाल, हसीना ने स्वीकार किया कि उनके शासनकाल में भी विपक्षी दलों ने कुछ चुनावों का बहिष्कार किया था।
बांग्लादेश को अब ‘प्रतिबंध और बहिष्कार’ के इस चक्र को तोड़ना होगा। देश को एक ऐसी ”वैध सरकार” की जरूरत है जो जनता की वास्तविक सहमति से शासन करे क्योंकि जख्मों को भरने का यही एकमात्र तरीका है।
इस बीच, बीएनपी ने जमात-ए-इस्लामी पर मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से ‘फासीवादी प्रोपेगेंडा’, राजनीतिक पाखंड और भ्रामक बयानबाजी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।