अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का विरोधाभासी व्यवहार लगातार जारी है।
नाटो सहयोगियों समेत पूरे अटलांटिक की सुरक्षा का ठेका लेते हुए अभी दो दिन पहले तक ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने को आतुर ट्रंप ने अब सबकी सुरक्षा से पल्ला झाड़ लिया है।
ट्रंप प्रशासन ने एशिया और यूरोप के अपने रक्षा सहयोगियों से साफ कर दिया है कि वे अपनी सुरक्षा का जिम्मा स्वयं संभालें, अमेरिका किसी का ठेका नहीं लेगा।
वह हर जगह सुरक्षा का खर्च और बोझ नहीं उठाएगा। पेंटागन ने शुक्रवार को 34 पन्नों की ‘नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति’ जारी की, जिसमें ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति साफ झलकती है।
नई रक्षा नीति का साफ संदेश है कि अमेरिका अब दुनिया का “चौकीदार” नहीं बनेगा। सहयोगियों को कड़ी नसीहतरक्षा रणनीति में यूरोप और एशिया के कई देशों को फटकार लगाई गई है। कहा गया है कि ये देश लंबे समय से अमेरिका पर निर्भर रहे हैं।
अब उनसे उम्मीद है कि वे रूस, उत्तर कोरिया जैसे खतरों से निपटने में ज्यादा जिम्मेदारी लें। दस्तावेज की शुरुआत ही तीखे शब्दों की गई है- बहुत लंबे समय तक अमेरिकी सरकार ने अपने नागरिकों और उनके हितों को प्राथमिकता नहीं दी।
2022 में क्या था: अमेरिका ने कहा था कि वह लैटिन अमेरिका और पड़ोसी देशों के साथ मिलकर शांति और स्थिरता बनाए रखेगा। सहयोग और साझेदारी पर जोर था।
2026 में क्या बदला: नई नीति में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ ने साफ किया है कि उसकी पहली प्राथमिकता पश्चिमी गोलार्ध यानी अपने आसपास के इलाके होंगे।
इसमें ग्रीनलैंड और पनामा नहर का खास तौर पर जिक्र किया गया है। रणनीति में कहा गया है कि अमेरिका इन इलाकों में अपने सैन्य और व्यापारिक हितों की हर हाल में रक्षा करेगा। जरूरत पड़ी तो तेज और निर्णायक कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा।
चीन पर बदला नजरिया
2022: चीन को अमेरिका की सबसे बड़ी चुनौती बताया गया था। ताइवान की सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने खुलकर समर्थन जताया था।
चीन की उकसावे वाली बयानबाजी, दबाव बनानेवाली गतिविधियों को अस्थिरता पैदा करने के चीनी पैटर्न का हिस्सा बताया गया था, जो पूर्वी चीन सागर, दक्षिण चीन सागर और भारत के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा तक फैला हुआ है।
2026: नई रणनीति कहती है कि अमेरिका चीन को अपमानित या कमजोर नहीं करना चाहता। मकसद सिर्फ इतना है कि चीन या कोई और देश अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हावी न हो। दिलचस्प बात यह है कि इस बार ताइवान का साफ जिक्र नहीं किया गया।
एशिया में जिम्मेदारी का बंटवारा
2022: अमेरिका ने उत्तर कोरिया से निपटने में खुद की बड़ी भूमिका बताई थी।
2026: नई नीति में कहा गया है कि दक्षिण कोरिया अब उत्तर कोरिया को रोकने की मुख्य जिम्मेदारी खुद संभाल सकता है, अमेरिका केवल सीमित मदद करेगा।
यूरोप और नाटो
2022: अमेरिका ने नाटो को अपनी सुरक्षा की रीढ़ बताया था और रूस को बड़ा खतरा माना था।
2026: रक्षा रणनीति मानती है कि रूस नाटो के लिए खतरा बना रहेगा, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है कि यूरोपीय देश इतने मजबूत हैं कि वे अपनी पारंपरिक सुरक्षा खुद संभाल सकते हैं।
अमेरिका ने यह भी साफ किया है कि वह यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी घटाएगा। यूक्रेन सीमा के पास तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या पहले ही कम की जा रही है।
मध्य पूर्व: सहयोगी आगे, अमेरिका पीछे
2022: अमेरिका ने ईरान से निपटने के लिए क्षेत्रीय साझेदारी और साझा सुरक्षा पर जोर दिया था।
2026: नई नीति में कहा गया है कि ईरान और उसके समर्थक संगठनों से निपटने की जिम्मेदारी अब क्षेत्रीय देशों की होगी। इजरायल को खुला समर्थन दिया गया है और अरब देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।