सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने के लिए कहा।
सोशल मीडिया पर वायरल टारगेट-शूटिंग वाले वीडियो को लेकर सीएम सरमा के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने सवाल किया कि याचिकाकर्ताओं ने गुवाहाटी हाई कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उसके अधिकार को “कमतर नहीं किया जाना चाहिए।” चीफ जस्टिस सूर्यकांत के अध्यक्षता वाली बेंच ने यह भी कहा कि चुनाव से पहले याचिकाएं दाखिल करना एक ट्रेंड बनता जा रहा है।
बेंच ने कहा, “यह एक परेशान करने वाला ट्रेंड है कि हर मामला यहीं खत्म होता है। आप हाई कोर्ट्स की वैलिडिटी को कम मत आंकिए। आप हाई कोर्ट का हौसला तोड़ रहे हैं।”
अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा?
वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने जवाब दिया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को उठाने के लिए अपनी समझ का इस्तेमाल कर सकता है और इस मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम की मांग पर जोर दिया।
चीफ जस्टिस की “हाईकोर्ट का हौसला तोड़ने” वाली फटकार पर सिंघवी ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री “संविधान और पूरे समुदाय का हौसला तोड़ रहे हैं।” मामले पर बहस करते हुए उन्होंने कहा, “अगर इस पर सुनवाई नहीं हुई तो लोगों के अधिकार कम हो जाएंगे। यह मौजूदा मुख्यमंत्री हैं जो जमीन न देने के लिए कह रहे हैं… हम पुलिस केस चाहते हैं। तो फिर मुझे दूसरे हाई कोर्ट भेजो।”
‘हाई कोर्ट को कमजोर करने की सोची समझी कोशिश’
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट शॉपिंग के लिए एक आसान जगह नहीं हो सकती। सिर्फ इसलिए कि सभी सीनियर वकील यहीं हैं। वहां अच्छे वकील भी हैं। यह हाई कोर्ट की अथॉरिटी को कमजोर करने की यह एक सोची-समझी कोशिश है।”
उन्होंने आगे कहा, “आपको दूसरे हाई कोर्ट में भेजना (गुवाहाटी हाई कोर्ट पर) एक गंभीर आरोप है, जिसे मैं पूरी तरह से खारिज करता हूं। मुझे पूरे देश में न्यायिक प्रशासन का ध्यान रखना है।”
क्या है मामला?
दरअसल, जिन घटनाओं पर सुनवाई की मांग हो रही है, उनमें रूलिंग भारतीय जनता पार्टी की असम यूनिट का जारी किया गया एक वीडियो भी शामिल है।
इसमें सीएम सरमा मुसलमानों की एक तस्वीर पर गोली चलाते हुए दिख रहे हैं। इसके अलावा, उससे पहले मियां, यानी बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के बारे में भी कमेंट किए गए थे।