मोदी सरकार में पहली बार मंत्रियों का रिव्यू, ‘संतोषजनक’ रेटिंग के बाद सक्रिय हुए मंत्री…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मंत्रालयों का रिव्यू किया गया, जिसमें प्रदर्शन के आधार पर कई मंत्रालयों को संतोषजनक श्रेणी में रखा गया है। इस मूल्यांकन का खास महत्व है क्योंकि सरकार की ओर से जब भी कैबिनेट का विस्तार किया जाएगा तो मंत्रालयों का यही रिपोर्ट कार्ड निर्णायक साबित होगा।

एनडीटीवी के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक बैठक की, जिसमें कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने सरकार के सभी मंत्रालयों के कामकाज पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। मंत्रालय को मूल्यांकन का मुख्य पैमाना मंत्रियों की ओर से शिकायत का निवारण और फाइलों के निपटारे दिखाई गई फुर्ती थी।

‘फाइलें लंबित न रहें और शिकायतें सुलझनी चाहिए’

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा-बेस्ड डिसीजन लेने और मंत्रालयों के बीच सहयोग जैसे अन्य क्षेत्रों ने भी सरकार की रिपोर्ट कार्ड प्रक्रिया में भूमिका निभाई। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने मंत्रालयों से कहा है कि फाइलें लंबित नहीं रहनी चाहिए और शिकायतें भी अनसुलझी नहीं रहनी चाहिए।

पीएम मोदी ने दिया ये निर्देश

पीएम मोदी ने मंत्रालयों को विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं की पहचान करने और उनके समाधान खोजने का आह्वान किया।

मंत्रालयों से यह बताने को कहा गया है कि काम में क्या बाधाएं आती हैं, किन रुकावटों के कारण निर्णय लेने, उनके कार्यान्वयन और लाभ वितरण में देरी होती है और इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं।

पीएम मोदी ने मंत्रालयों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने बायोगैस के उपयोग के बारे में भी बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट बैठक के दौरान ईंधन दक्षता पर भी जोर दिया। उन्होंने अनावश्यक विदेश यात्राओं में कटौती करने का आग्रह किया।

मंत्रियों ने संभाला मोर्चा

कई मंत्रियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों को प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा पुराने और अप्रासंगिक नियमों को समाप्त करने का निर्देश दिया।

बैठक के बाद कृषि मंत्री ने अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में प्रशासनिक कार्य-संस्कृति में बदलाव लाने के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि फाइल तैयार करने, निर्णय लेने और मसौदा तैयार करने की गुणवत्ता में सुधार लाने की आवश्यकता है।

ड्राफ्टिंग को एक अहम क्षेत्र बताते हुए उन्होंने विभागों से आग्रह किया कि वे ऐसे अधिकारियों को प्रशिक्षित करें जो मजबूत, स्पष्ट और नीति के अनुरूप तरीके से फाइलें और नोट्स तैयार कर सकें।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लंबित अदालती मामलों के मुद्दे पर भी चर्चा की। सभी विभागों से कहा गया है कि वे लंबित मामलों की सूची तैयार करें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारियों को नामित करें, कानूनी तैयारियों को सुदृढ़ करें और यदि आवश्यक हो तो बेहतर वकीलों को नियुक्त करें।

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