पश्चिम एशिया में तनाव और प्राकृतिक गैस संकट के बावजूद भारत ने रूस से प्रतिबंधित एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) खरीदने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत के इस फैसले के बाद भारत के लिए रवाना होने वाला एक रूसी एलएनजी टैंकर फिलहाल अनिश्चितता में फंस गया है। हालांकि, भारत गैर-प्रतिबंधित रूसी एलएनजी कार्गो को लेकर बातचीत जारी रखे हुए है।
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता भारत का यह रुख ऊर्जा जरूरतों और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच संतुलन साधने की कोशिश माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की तुलना में एलएनजी कार्गो को छिपाना कठिन होता है और उस पर वैश्विक निगरानी अधिक रहती है, जिससे अनुपालन का जोखिम बढ़ जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस के पोर्तोवाया संयंत्र से निकले एलएनजी कार्गो को भारत नहीं भेजा जा सका। 138,200 घन मीटर एलएनजी लेकर चलने वाला ‘कुन्पेंग’ टैंकर अप्रैल के मध्य में गुजरात के दाहेज एलएनजी टर्मिनल पहुंचने वाला था। भारत की अनिच्छा के बाद यह जहाज फिलहाल सिंगापुर के समुद्री क्षेत्र में खड़ा है और इसके अगले गंतव्य को लेकर फैसला नहीं हो सका है।
सूत्रों ने बताया कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने 30 अप्रैल को रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन के साथ बैठक में भारत का रुख स्पष्ट कर दिया था।
सोरोकिन ने जून में आगे बातचीत के लिए फिर भारत आने की बात कही है। हालांकि, इस मामले पर भारत सरकार और रूसी दूतावास की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
रूस भारत को अधिक एलएनजी बेचने का इच्छुक है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और सख्त निगरानी के कारण भारतीय कंपनियां सतर्क हैं।
रूस की आर्कटिक एलएनजी-2 परियोजना समेत कई गैस परियोजनाओं पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं।सूत्रों के अनुसार, मास्को भारत के साथ एलएनजी के अलावा पोटाश, फास्फोरस और यूरिया जैसे उर्वरकों की दीर्घकालिक आपूर्ति के समझौते भी करना चाहता है।