दिल्ली-ग्रेटर नोएडा और लखनऊ से जुड़े ₹40 करोड़ के फसल बीमा घोटाले के तार, जांच में बड़ा खुलासा…

नदी, पहाड़, वन विभाग, चकमार्ग व तालाब की जमीन पर फर्जी तरीके से प्रधानमंत्री फसल बीमा करा 2024 में किए गए 40 करोड़ रुपये के घोटाले के तार दिल्ली, लखनऊ व ग्रेटर नोएडा से जुड़ गए हैं।

प्राथमिक जांच में पता चला है कि विकासखंड चरखारी के ग्राम कुआं में 56 घोटालेबाजों ने बीमा करा लगभग 25 लाख का भुगतान ले लिया।

इसमें कुछ बीमा पालिसी का भुगतान दिल्ली में महारानी बाग स्थित केनरा बैंक शाखा में भेजा गया। जबकि विकासखंड कबरई के ग्राम चिचारा की 1608 बीघा जमीन पर भी जालसाजों ने घोटाले की फसल उगा दी।

इसमें 159 किसानों ने फर्जी तरीके से पालिसी लेकर खेल कर दिया। लेकिन क्रांप इंश्योरेंस पोर्टल के डाटा में हेरफेर के कारण यह पता नहीं चल पा रहा कि किसान आखिर कहां के है और भुगतान कितना हुआ।

वास्तविक किसानों को इस बारे में कुछ पता नहीं चला। वहीं क्लेम भुगतान ग्रेटर नोएडा के आइसीआइसीआइ बैंक, झांसी, हमीरपुर व महोबा के बैंक खातों में गया। विकासखंड पनवाड़ी की ग्राम पंचायत खगर्रा में 117 बाहरी किसानों ने खरीफ 2024 का बीमा कराया और भुगतान एयरपोर्ट अथोरिटी लखनऊ के इंडियन बैंक में गया।

इससे आशंका है कि बीमा कंपनी के बड़े अफसर भी इसमें शामिल हो सकते हैं। घोटाले में जेल जा चुके बीमा कंपनी इफको टोकियाे के जिला प्रबंधक जालौन निवासी निखिल चतुर्वेदी ने करीबियों, रिश्तेदारों का भी बीमा कराया।

गुजरात के जूनागढ़, मध्य प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों के लोगों के आधार कार्ड, गाटा संख्या व बटाइनामा लगा गड़बड़ी की व उनके बैंक खातों में फसलों में नुकसान दिखा मुआवजे की रकम भेजी।

घोटालेबाजों ने चकबंदी वाले गांव चुने, जिनकी जमीन का डेटा आनलाइन प्रदर्शित नहीं होता। हलफनामा में स्वयं को बटाईदार दिखा बीमाकर्ता की दी जानकारी सही मानी जाती है।

इसका सत्यापन बीमा कंपनी करती है, जो नहीं किया गया। घोटाले में पहली रिपोर्ट 27 अगस्त, 2025 को बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक निखिल समेत अज्ञात पर दर्ज हुई थी। इसके साथ छह मुकदमे और दर्ज हैं।

अब तक 34 लोग जेल भेजे जा चुके हैं। सदर तहसील में मामले सीबीआइ जांच को लेकर 157 दिनों से अनशन पर बैठे जय जवान जय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुलाब सिंह ने बताया कि चिचारा व ग्राम कुआं में खरीफ 2024 की तरह ही रबी 2024 में खेल किया गया।

उपकृषि निदेशक रामसजीवन कहते है जांच अभी चल रही है। जो भी दोषी सामने आ रहा है, कार्रवाई कराई जा रही है।

इस तरह किया गया फर्जीवाड़ा

फसल बीमा में फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों ने कंपनी से सांठगांठ कर ऐसे गांवों को चुना, जहां चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। बीमा करने के लिए पोर्टल (प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल) पर भू-स्वामी व बटाईदार अपना बीमा करा सकता है।

चकबंदी प्रक्रियावाले गांवों का डाटा प्रदर्शित नहीं होता, जिससे कोई भी 10 रुपये के स्टांप पर बटाईनामा बनवाकर जमीन पर बीमा करा सकता है। इसमें वह जो जानकारी भर देता है वह सही मानी जाती है। खाली स्टांप भी इसमें लगाया जा सकता है। उसी के कागजातों के आधार पर बीमा होता है।

इसकी जांच बीमा कंपनी ही करती है। इसके बाद व्यक्ति टोल फ्री नंबर पर फोन कर नुकसान की जानकारी देता है।

इसकी जांच भी बीमा कंपनी करती है और क्लेम पास कर भुगतान दे देती है। जाहिर है कहीं न कहीं बीमा कंपनी के लोग भी इसमें शामिल है।

किसी भी मामले का सत्यापन नहीं किया गया। यदि सत्यापन कराया जाता तो शायद फर्जी भुगतान होने से बच जाता।

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