अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति और उसके आक्रामक क्रियान्वयन ने अमेरिका के कई शहरों में असंतोष को और तेज कर दिया है।
मिनियापोलिस इसका ताजा उदाहरण बन गया है, जहां इमिग्रेशन छापेमारी, प्रदर्शनकारियों से टकराव और फेडरल एजेंसियों की भूमिका पर उठते सवालों ने हालात को विस्फोटक बना दिया है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की इमिग्रेशन नीति- जिसे समर्थक सख्त कानून व्यवस्था बताते हैं- अब अमेरिका में सामाजिक तनाव, राजनीतिक टकराव और व्यापक जन असंतोष का बड़ा कारण बनती जा रही है।
इमिग्रेशन छापेमारी से लोगों में गुस्सा
ट्रंप द्वारा मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे को यह चेतावनी देना कि वह संघीय कानून न मानकर “आग से खेल रहे हैं”, स्थानीय और संघीय सरकारों के बीच टकराव को और गहरा कर गया है। शहर प्रशासन का कहना है कि स्थानीय पुलिस इमिग्रेशन कानून लागू नहीं करेगी, जबकि व्हाइट हाउस इसे कानून का उल्लंघन बता रहा है।
इसी बीच, ट्रंप प्रशासन के ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ के तहत जारी इमिग्रेशन छापेमारी ने आम नागरिकों में भय और गुस्सा दोनों पैदा किया है। बीते हफ्तों में मिनियापोलिस में प्रदर्शनकारियों और भारी हथियारों से लैस इमिग्रेशन एजेंटों के बीच लगातार झड़पें हुई हैं।
हालात तब और बिगड़ गए जब दो अमेरिकी नागरिकों- रेनी गुड और एलेक्स प्रेट्टी- की फेडरल अधिकारियों की गोलीबारी में मौत हो गई।इन घटनाओं ने विरोध को सिर्फ मिनियापोलिस तक सीमित नहीं रखा। छोटे-बड़े कई शहरों में इमिग्रेशन नीति के खिलाफ प्रदर्शन फैल गए हैं।
16 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा
यहां तक कि अमेरिकी पॉप कल्चर में भी इसका असर दिखा, जब मशहूर गायक ब्रूस स्पि्रंगस्टीन ने इन मौतों के विरोध में एक गीत जारी किया।सरकार के भीतर भी विरोधाभासी संकेत दिख रहे हैं।
एक ओर प्रशासन ने छापेमारी के तरीके को “और लक्षित” बनाने की बात कही और आइसीई को प्रदर्शनकारियों से टकराव से बचने के निर्देश दिए, वहीं दूसरी ओर अटार्नी जनरल पैम बोंडी ने 16 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा करते हुए साफ कहा कि “गिरफ्तारियां और कानून का सख्त पालन जारी रहेगा।”
असंतोष को और बल तब मिला जब एक फेडरल जज ने आइसीई पर दर्जनों अदालती आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया। फेडरल जज पैट्रिक श्लिट्ज ने अदालत में कहा कि आइसीई ने कम से कम 74 मामलों में 96 अदालती आदेशों का उल्लंघन किया है।
उन्होंने लिखा कि यह सूची “कानून के राज की परवाह करने वाले किसी भी व्यक्ति को चिंता में डालने के लिए काफी है।”इससे ट्रंप प्रशासन की कार्रवाई को लेकर यह बहस तेज हो गई है कि कानून लागू करने के नाम पर क्या कानून के दायरे को ही नजरअंदाज किया जा रहा है।
किसे समर्पित किया गाना?
प्रेट्टी और गुड के सम्मान में बना आंदोलन गीत आइएएनएस के अनुसार, मशहूर गायक और गीतकार ब्रूस स्पि्रंग्सटीन ने आंदोलन को अपने नए संगीत के जरिये नया आयाम दिया है। उन्होंने इमिग्रेशन कार्रवाई में मारे गए रीनी गुड और एलेक्स प्रेट्टी के सम्मान में स्ट्रीट्स आफ मिनियापोलिस नाम से नया आंदोलन गीत तैयार किया है।
इस गाने के जरिये उन्होंने ट्रंप की निजी सेना को लक्ष्य कर हमला किया है। उन्होंने अपने गाने को अपने अप्रवासी पड़ोसियों को समर्पित किया है। स्पि्रंग्सटीन ने एक बयान में कहा कि बीते शनिवार को उन्होंने ये गाना लिखा था और बुधवार को इसे जारी कर दिया है। ये गाना हमारे निर्दोष अप्रवासी पड़ोसियों और एलेक्स प्रेट्टी और रीनी गुड को समर्पित है।
इससे पहले वह एड्स संकट पर भी एक गीत ‘स्ट्रीट्स आफ फिलाडेल्फिया’ बना चुके हैं। प्रेट्टी के नए वीडियो से और बढ़ा असंतोष एपी की रिपोर्ट के अनुसार, बीते शनिवार प्रदर्शन के दौरान बार्डर पैट्रोल अधिकारियों की गोली का शिकार हुए 37 साल के एलेक्स प्रेट्टी से संबंधित नए वीडियो सामने आए हैं।
प्रेट्टी की हत्या पर बहस तेज
इनमें प्रेट्टी को मौत से 11 दिन पहले यानी 13 जनवरी को संघीय अधिकारियों के साथ उलझते देखा जा रहा है। ताजा वीडियो में प्रेट्टी को संघीय अधिकारियों पर झल्लाते और उनसे हाथापाई करते देखा गया है। अधिकारियों ने उनको पकड़कर जमीन पर गिरा दिया, जिससे उनकी विंटर कोट भी निकल गई थी। जब वह वापस मुड़े तो उनकी कमर से बंधी एक बंदूक नजर आई।
हालांकि, वीडियो में प्रेट्टी को बंदूक निकालते नहीं देखा गया। एलेक्स प्रेट्टी से जुड़ा नया वीडियो आने के बाद उनकी हत्या पर बहस तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि प्रेट्टी के साथ इतना सब होने के बावजूद, उन्होंने बंदूक इस्तेमाल नहीं की, फिर भी उनको गोली मार दी गई।