सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अतिरिक्त विशेष अदालतें स्थापित करने से न्यायिक प्रणाली मजबूत होगी क्योंकि आरोपित को आपराधिक मामलों में जमानत या जल्द सुनवाई जैसी राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट आने की जरूरत नहीं होगी।
शीर्ष अदालत ने छह जनवरी को केंद्र और दिल्ली सरकार से मोहम्मद हेदायतुल्लाह नामक व्यक्ति के आइसिस से ¨लक से संबंधित 2021 के मामले में दिन-प्रतिदिन की सुनवाई के लिए विशेष अदालत स्थापित करने पर विचार करने को कहा था।
CJI ने क्या कहा?
इस मामले की जांच एनआइए कर रही है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बुधवार को केंद्र की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्य भाटी से दिल्ली में विशेष अदालत स्थापित करने में हुई प्रगति के बारे में पूछा।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ”विचार यह है कि आप कैसे एक मजबूत तंत्र बनाते हैं कि उनमें से किसी को भी इन अदालतों में आने की जरूरत न हो? और ऐसा तब होगा जब अतिरिक्त अदालतें स्थापित की जाएंगी।” पीठ ने एएसजी से 10 फरवरी तक यहां विशेष अदालत स्थापित करने में हुई प्रगति के बारे में सूचित करने को कहा। अब इस मामले पर उस दिन सुनवाई होगी।
पीठ हेदायतुल्लाह की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उस पर आरोप है कि उसने देश में आइसिस की विचारधारा का प्रचार करने और अन्य व्यक्तियों की भर्ती के लिए टेलीग्राम ग्रुप्स का इस्तेमाल किया था। प्रधान न्यायाधीश ने पूर्व में कहा था कि सुनवाई में अत्यधिक देरी से आरोपित की ओर से यह वैध दलील दी जाती है कि उसे बिना मुकदमा चलाए लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
कब किया गया था गिरफ्तार?
दिल्ली हाई कोर्ट ने हेदायतुल्लाह को जमानत देने से इन्कार कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि गुरुग्राम की एक आइटी कंपनी में कार्यरत एवं एमबीए स्नातक हेदायतुल्लाह आइसिस का निष्क्रिय समर्थक नहीं था क्योंकि सुबूतों से पता चलता है कि उसने हिंसक तरीकों से भी खिलाफत स्थापित करने के लिए जिहाद की पैरवी की थी। 2021 में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एनआइए ने हेदायतुल्लाह को 22 अक्टूबर, 2022 को गिरफ्तार किया था।