60 TB बिलिंग डेटा और 1.7 लाख रेस्टोरेंट्स की जांच… AI ने कैसे उजागर किया बिरयानी चेन का 70 हजार करोड़ का कथित घोटाला?…

हैदराबाद की तीन चर्चित बिरयानी चेन (रेस्टोरेंट) से जुड़ी आयकर जांच ने देशभर के रेस्तरां उद्योग में कथित रूप से 70 हजार करोड़ रुपये तक की बिलिंग हेरफेर का मामला उजागर किया है।

सूत्रों के अनुसार, जांच में बिक्री के रिकार्ड को व्यवस्थित तरीके से मिटाने और संशोधित करने के संकेत मिले हैं, जिससे कारोबार कम दिखाकर कर देनदारी घटाई गई। माना जा रहा है कि हाई प्रोफाइल टैक्स चोरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उच्च क्षमता वाली फोरेंसिक तकनीक के बगैर शायद ही पकड़ में आती।

  1. 60 टेराबाइट डाटा की फोरेंसिक जांच, हजारों जीएसटी नंबर और पैन संदिग्ध
  2. 6 साल से चल रहा था टैक्स चोरी का गड़बड़झाला
  3. 2.4 लाख करोड की कुल बिक्री दर्ज की गई केवल एक साफ्टवेयर से
  4. 13000 करोड़ के बिल डिलीट किए जाने का आरोप
  5. 19400 करोड़ के बिल में बीते छह वर्षों में की गई हेराफेरी
  6. 14% तक बिल डिलीट किए गए या उनमें हेराफेरी की गई
  7. 27% तक बिक्री को कम करके दिखाए जाने का अनुमान

60 टेराबाइट डाटा की जांच

अधिकारियों ने करीब 60 टेराबाइट डिजिटल डाटा और यूपीआइ लेन-देन की बारीकी से जांच की है। इस जांच के दायरे में देशभर के लगभग 1.7 लाख रेस्तरां आ गए। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, 2019-20 के बाद से अब तक करीब 70,000 करोड़ रुपये की कमाई छिपाई गई है। अकेले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह आंकड़ा 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है।

साफ्टवेयर में ‘बल्क डिलीट का गोपनीय बटन

जांच में पता चला कि ये रेस्टोरेंट एक खास तरह के बिलिंग साफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे थे। इस साफ्टवेयर में एक ‘बल्क डिलीट’ फीचर था, जिसकी मदद से दुकानदार एक साथ पूरे महीने का बिक्री रिकार्ड मिटा सकते थे। 

यह भी सामने आया है कि हजारों पैन कार्ड्स के जरिये बिक्री का रिकार्ड छिपाया गया। फिलहाल आयकर विभाग डिलीट किए गए डाटा को वापस पाने (रिकवर करने) की कोशिश कर रहा है।

एआई की वजह से आधिकारिक चैनलों से मिलने वाले रिकार्ड की प्रतीक्षा के बजाय सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी को जीएसटी नंबरों को रेस्तराओं से जोड़ने में मदद मिली।

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